आलोचना के लिए कुछ भी पवित्र नहीं ____ रघुवंश मणि
संस्कृति की नगरी वाराणसी में 5 और 6 मई को हिन्दी की प्रसिध्द छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा पर आयोजित एक संगोष्ठी 'महादेवी वर्मा: वेदना और विद्रोह' ने अकारण विवाद का रूप ले लिया। इस गोष्ठी के समापन सत्र में हिन्दी के शीर्षस्थ आलोचक डॉ। नामवर सिंह ने...
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विशाल श्रीवास्तव
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[14 Jun 2007 10:26 AM]



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