मित्र
मित्र थे जो चुनते थे शर्ट की आस्तीन से अदृश्य भुनगे कन्धे से साफ़ करते थे धूल ख्याल से भरकर छूते थे माथा ध्यान रखते थे मित्र झूठ बोलकर बचाते थे मित्र क्रूर शिक्षक और क्रुध्द पिता से मित्र थे जिन्होंने सिखाया प्रेम करना जो हमें चौराहों पर मिलते थे जिनस...
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विशाल श्रीवास्तव
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[29 Jul 2007 11:11 AM]



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