वो आई
वो आई उसके आने ने जैसे रात के आसमान में फेंका कंकड़ खिड़की के आकाश में पहले चाँद थरथराया फिर जल काँपा आसमान का फिर एक एक करके झिलमिलाये तारे सबने कहा देखो वो आई उसके आने से जागा मेरे कमरे का ऍंधेरा उसकी तांबई रंगत से खुश हुआ दरवाजा खुश हुए मेरे गन्दे क...
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विशाल श्रीवास्तव
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[19 Aug 2007 00:39 AM]



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