कवि के रक्त में डुबकी लगाकर
घबराइये नहीं यह पंक्ति मेरी नहीं है। यह पंक्ति मैंने उधार ली है अजीत चौधरी की कविता से। कविता का नाम है - 'समीक्षक जानते है', यह कविता वागर्थ के अगस्त अंक में छपी है। यह कविता मुझे जोरदार लगी। अजीत चौधरी को मैंने काफी दिनों बाद पढ़ा है, काफी पहले उनकी...
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विशाल श्रीवास्तव
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[31 Aug 2007 14:47 PM]



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