प्रकाश
प्रकाश हमें चाहिए धूप कि हम पढ़ सकें जीर्ण पन्नों को सुधार सकें नये लिखे के हिज्जे हमने बोई है आसमानी खेत पर उजाले की कुँवारी हरी दूब हमारा रक्त पहले से है वातावरण में देखा है हमने आकाश के आईने में अपने पीले चेहरों का अक्स हम पोंछते हैं नारंगी सूरज पर...
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विशाल श्रीवास्तव
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[09 Mar 2008 11:04 AM]



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