आखिरी बार कब आपने अपने मन की सुनी थी?
आज यूँ कहीं पढ़ रहा था कि प्रसिद्ध कवि मुक्तिबोध अपनी मनःस्थिति का बेहद सम्मान करते थे। जाहिर है उनकी इन मनःस्थितियों में दो चीज+ें अवश्य थीं - बतियाना और चाय पीना। सुना है कि अपने ब्याह में वे सिर्फ इसलिए विलम्ब से पहुँचे कि नदी के किनारे किसी से बति...
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विशाल श्रीवास्तव
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[13 Nov 2008 08:55 AM]



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