मातृ दिवस पर मुनव्वर राणा के चंद शेर ।।
लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती बस एक मां है जो कभी ख़फ़ा नहीं होती ।। इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है ।। मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसू मां ने मुद्दतों नहीं धोया दुपट्टा अपना ।।...
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yunus
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[11 May 2008 01:05 AM]



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