ये किस शहर में हम आ निकले

तरंग दिन तो बीत जाता है दफ्तरों में । पर कटती नहीं रातें । जी नहीं ये प्‍यार-व्‍यार का चक्‍कर नहीं है । रूमानियत की कच्‍ची सड़क पर मत जाईये । थोड़ा गंभीर हो जाईये और सुनिए । मुंबई की ये रातें जश्‍न की रातें हैं । समंदर किनारे का ये शहर सितंबर से लेकर दिसं... [पूरी पोस्ट]
writer yunus
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[09 Oct 2008 00:11 AM]

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