इस बार नहीं मनाएंगे हम जश्न नये साल के आगमन का । इस बार खोजेंगे हम मुट्ठी भर जीवित संवेदनाएं
इस बार नहीं मनाएंगे हम जश्न नए साल के आगमन का इस बार चुनेंगे हम अपने जल चुके घरों की राख से अंगारे और घोल लेंगे इन्हें अपनी शिराओं में....रक्त में । इस बार सहेज कर रखेंगे हम अपने-अपने हिस्से का उजाला और बांट लेंगे इसे दूसरों के हिस्सों के...
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yunus
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[30 Dec 2008 23:12 PM]



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