मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यों डर रखूँ
मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यों डर रखूँ जिंदगी आ, तेरे क़दमों पर मैं अपना सर रखूँ जिसमें माँ और बाप की सेवा का शुभ संकल्प हो चाहता हूँ मैं भी काँधे पर वही काँवर रखूँ हाँ, मुझे उड़ना है लेकिन इसका मतलब यह नहीं अपने सच्चे बाज़ुओं में इसके-उसके पर रखू...
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डॉ० कुअँर बेचैन
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[16 Apr 2009 10:54 AM]



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