बीजगणित-सी शाम

दिल के दरमियाँ PRESENTS अंकगणित-सी सुबह है मेरी बीजगणित-सी शाम रेखाओं में खिंची हुई है मेरी उम्र तमाम। भोर-किरण ने दिया गुणनफल दुख का, सुख का भाग जोड़ दिए आहों में आँसू घटा प्रीत का फाग प्रश्नचिह्न ही मिले सदा से मिला न पूर्ण विराम। जन्म-मरण के 'ब्रैकिट' में यह हुई ज़िंदगी... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ० कुअँर बेचैन
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[16 Apr 2009 10:59 AM]

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