दिन से लंबा ख़ालीपन
नींदें तो रातों से लंबी दिन से लंबा ख़ालीपन अब क्या होगा मेरे मन? मन की मीन नयन की नौका जब भी चाहे बीती-अनबीती बातों में डूबे-उतराए निष्ठुर तट ने तोड़ दिए हैं बर्तुल लहरों के कंगन। अब क्या होगा मेरे मन? जितनी साँसें रहन रखी थीं भोले जीवन ने एक-एक कर...
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डॉ० कुअँर बेचैन
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[16 Apr 2009 11:04 AM]



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