सुबह
सोई खिड़कियों को जगा गई नर्स-सी हवा। देकर मधुगंधिनी दवा। रोगी दरवाज़ों की बाजू में किरणों की घोंपकर सुई सूरज-चिकित्सक ने रख दी फिर धुली हुई धूप की रुई होने से बच गई चौखट विधवा। जगा गई नर्स-सी हवा। कुँअर बेचैन...
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डॉ० कुअँर बेचैन
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[16 Apr 2009 11:11 AM]



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