पीड़

अशांत महासागर कोई न जाने इश्क़ की ज़ात को न कोई पहचाने तेज़ाब की बरसात को खिला फूल तो है सदा ही महकता कोई न जाने सूखे पत्तों के जज़बात को कोई न जाने दिल की पीड़ को कोई न देखे दिल होए लीरो-लीर को इश्क़ के सागर में लगाते हैं सारे ही डुबकी न कोई पहचाने शिकरे यार को क... [पूरी पोस्ट]
writer vijaymaudgill
views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[24 Sep 2008 10:55 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix