इक राज़
इक राज़ बताया हमे, आँखों के नीर ने पीरों को पीर कर दिया, दुनिया की पीर ने चिडियों को चुगते देखी रहा था, कि अचानक हँस कर कटोरा फेंक दिया इक फ़क़ीर ने मजबूरियों की आड़ मे, गिरता चला गया रोका तो था मुझे बहुत, मेरे ज़मीर ने उस बादशाह का कोई मोहरा नहीं पिटा दी...
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adab-ghar
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[16 May 2008 12:31 PM]



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