याद आये
ज़िद पर बाबूजी के चांटे याद आये फिर अम्मा के आटे-बाटे याद आये बाबूजी की बेंत देखते ही मुझको यारों के संग सैर-सपाटे याद आये इतने दिन मेरे घर, इतने भाई के दिन कैसे माँ-बाप के बाँटे याद आये...
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adab-ghar
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[16 May 2008 20:17 PM]



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