रिटायर्ड – हर्ट

adab-ghar जब तक मेरी ज़रूरत थी घर में कितनी इज़्ज़त थी खपता रहा ज़िन्दगी भर जितनी मुझमे ताक़त थी बेटों के घर हफ़्ता भर बस रहने की मोहलत थी बहुओं का तो नाम था बस सब बेटों की हरकत थी सोच ले ऐ बच्चों की माँ यही हमारी क़िस्मत थी... [पूरी पोस्ट]
writer adab-ghar
views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[18 May 2008 05:10 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix