'पानी के आदमियों जैसे हजार-हजार सर' और कौसिकी की धार
कोसी इलाके का हूँ शायद इसलिए परेशान ज्यादा हूँ...जाने पहचाने चेहरों, गलियों, सड़कों का दर्द, उनसे जुड़ी पीड़ा शायद ज्यादा सीधी लगती है. पुणे में रहकर क्या करूँ...न्यूज़ जिस वक्त खोज रहा था उस समय चैनलों के अपने धंधे चल रहे थे. फोन पर हर अपनों से पूछत...
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राजेश रंजन
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[31 Aug 2008 12:19 PM]



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