माँ (बारह क्षणिकाएँ)

मेरी आवाज़ माँ (बारह क्षणिकाएँ) आजकल माँ बहुत बतियाती है जब भी फोन करो आस-पडोस की भी बाते सुनाती है २. न जाने क्यो लगता है माँ की आँखे नम है उसे कही न कही कुछ खो देने का गम है ३. सुबह सबसे पहले उठ कर सारा काम निपटाती है मेरी काम वाली आई कि नही इसकी चिन्ता लगाती... [पूरी पोस्ट]
writer सीमा सचदेव
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[20 Jan 2009 04:11 AM]

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