अज्ञात कन्या का मर्म

मेरी आवाज़ अज्ञात कन्या का मर्म (राष्ट्रीय कन्या दिवस विशेष) अज्ञात कन्या का मर्म भिनभिनाती मखियाँ कुलबुलाते कीडे सूँघते कुत्ते कचरादान के गर्भ मे कीचड़ से लथपथ फिर से पनपी एक नासमझ जिन्दा लाश छोटे-छोटे हाथों से मृत्यु देवी को धकेलती न जाने कहाँ से आया दुबले-पत... [पूरी पोस्ट]
writer सीमा सचदेव
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[04 Feb 2009 06:32 AM]

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