"ला बुढिया गडास {गडासा} आज खून के नदी बहा देबउ !
कहानी सत्य घटनाओ पर आधारित होते हुए भी स्थान, काल ,पात्र काल्पनिक है . किसी व्यक्ति विशेष स्थान विशेष से मेल खाता हो तो स्तंभकार पर सॉरी बोलने का दवाब नाही बनाया जा सकता है .गलती वश ये मनोरंजन का साधन बन गया है .समाज मे ये परम्परा पुरातन है कि एक डॉक...
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Sanjay Sharma
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[29 Dec 2007 02:59 AM]



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