लो विदा अब वर्ष तुम भी !

दिव्य दृष्टि लो विदा अब वर्ष तुम भी ,थक गए हो बहुत चल कर !अब तुम्हारे भार को, नए वर्ष के कंधे मिलेगे/कौन जाने दर्द कितना बांधे जा रहे हो /नए सूरज को नयन की रौशनी दिए जा रहे हो /अब तुम्हारे साथ के पल ,आँख मे बन गए काजल . साल २००७ से क्या शिकवा ? हमने इस साल को दिय... [पूरी पोस्ट]
writer Sanjay Sharma
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[31 Dec 2007 06:29 AM]

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