दो रुपये की शिक्षा !
मैट्रिक करके कॉलेज मे दाखिला ले किसी छुट्टी का आनंद ले रहा था अपने गाँव . बात सन् १९७९ की ही है .तब मेरे भइया हिन्दी ऑनर्स मे नामांकित हो गए थे . मैं नही जानने वाले मुझे भइया का भरत कहा करते है .वो भी शायद इसलिए कि मैं उनकी किसी बात को काट-पीट नही कर...
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Sanjay Sharma
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[28 Mar 2008 04:28 AM]



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