हां रे बेटा ऐसे ही पढ़ना

दिव्य दृष्टि कर्ज लेकर किराने की बड़ी दुकान चला रहे हीरालाल की एकलौती संतान करण पढ़ाई के नाम फान्केबाजी करना भाता था. उसकी माँ अनपढ़ बाप सातवी पास .हर बाप की तरह हीरालाल अपने लाल को जवाहर लाल बनाने को सोच रखा था . इस दिशा मे दो टिउशन लगा कर प्रयास शुरू कर दिया गया... [पूरी पोस्ट]
writer Sanjay Sharma
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[29 Mar 2008 06:56 AM]

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