अच्छा लगता हूँ !

दिव्य दृष्टि शब्द ज़माने का .वाक्य बन गया मेरे से . सो सर्वाधिकार सुरक्षित कैसे हो ? इन बने -बिगडे वाक्य को कविता, गीत ,गजल,या छंद क्या कहा जाय ,मालूम नही . बस अच्छा लगता हूँ } आजकल सोचते हुए अच्छा लगता हूँ। ख़ुद को कोसते हुए अच्छा लगता हूँ । दर्द जो सीने से उठकर... [पूरी पोस्ट]
writer Sanjay Sharma
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[04 Jul 2008 02:19 AM]

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