"करारा जबाब "

दिव्य दृष्टि वो आया हमारे कपडे फाड़े हमारे भाई के खून से हमारे घर का दीवार रंगा हर रिश्ते को रुलाया सिसकिया अभी थमने का नाम नही ले रही ये कह रहे है हमारा "करारा ज़बाब" है . वो नौ नपुंशक साठ घंटे के अनुष्ठान में दो सौ लोगों का हवन कर गया . और लगभग इतनी ही अधजली लकड... [पूरी पोस्ट]
writer Sanjay Sharma
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[26 Dec 2008 01:54 AM]

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