हिन्दी निकष
एक गीत ;"वे संबोधन----" वे संबोधन याद करो । अपने विगत क्षणों से प्रियतम- थोडा तो संवाद करो । अधरों ने विस्मृत करने का बहुत अधिक आयास किया है । किंतु तुम्हारी सुधियों के संग प्राणों ने वनवास किया है । स्वर्णपुरी से अब तो अपने स्वप्नों को आज़ाद करो । वे...
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आनंदकृष्ण
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[04 Oct 2008 10:25 AM]



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