चार मिसरे
चार मिसरे समाद फरमाएं- हमने जो ख्वाब थे सजा डाले- देख लो-वक़्त ने मिटा डाले। आरजू अब सुपुर्दे-खाक करो- मैंने सारे वो ख़त जला डाले....
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आनंदकृष्ण
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[29 May 2009 04:42 AM]



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