हिन्दी निकष
इन दिनों थोड़ी फुर्सत है तो कुछ पुराने कागजात खंगाल रहा हूँ। पुरानी ग़ज़लें और गीत और ......... बहुत कुछ अपनी स्मृतियों के साथ फिर से निकल-निकल कर आ रहे हैं। ........ (चंद तस्वीरे-बुतां, चंद हसीनों के खुतूत, बाद मरने के मिरे घर से ये सामां निकला।) एक...
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आनंदकृष्ण
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[21 Jul 2009 11:40 AM]



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