दीपक रे ! जलते रहना

manthan आनंद अनल एक बार फिर आ गयी दिवाली चमकती हुई, उजाला बिखेरती हुई। दिवाली उत्सव की प्रतीक है, तो जीवन में स्वच्छता, शुचिता, पवित्रता का संदेशवाहक भी। संदेश ग्रहण करना और बात है, मगर उत्सव मनाना हमारी संस्कृति है। युगों से हम अपनी संस्कृति, सभ्यता की रक्ष... [पूरी पोस्ट]
writer सुनील मंथन शर्मा
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[01 Nov 2008 09:50 AM]

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