ईश्वर! कहाँ हो तुम
सुनील मंथन शर्मा ईश्वर है! इसे सदियों से ढूंढा जा रहा है। कोई पत्थरों में ढूंढ रहा है तो कोई मंदिरों में। कोई तस्वीरों में तो कोई तीर्था में, धामों में. भूखे-प्यासे, नंगे पांव, श्रद्धा-विश्वास के साथ, पागलों की तरह. सीधे कहें, कलियुग में ईश्वर के लिए...
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सुनील मंथन शर्मा
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[01 Nov 2008 11:51 AM]



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