इस दिसम्बर में.........
इस दिसम्बर से जीवन में अधकचरे रिश्तों की धुंध घने कोहरे सी छाई थी----- उमंगों का शिथिल होना, ठिठुरती ठण्ड के आभास जैसा विचारों को संकुचित करता, भावनाओं से उठती सिहरन से कोमल मन कंपकपाता था----- ऐसे में तुम काँधे पे झोली लटकाए, मेरे जीवन में रंग भरने...
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Jyotsna Pandey
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[25 Dec 2008 09:38 AM]



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