बिसलेरी और प्रेमी
हाल ही में मुझे कुतुब मीनार देखने का मौका मिला। देखनी तो पहले चाहिए थी, पर संयोग ही नहीं बना। मीनार की खूबसूरती की सराहना किये बिना कौन रह सकता है? मेरा मन भी उसे निहार कर मुग्ध होता रहा। सचमुच यह मीनार हमारी वास्तुकला का गज़ब का सबूत है। पर वहाँ जाक...
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भवेश झा
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[11 Oct 2008 12:43 PM]



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