आतंकवाद के बहाने
विगत दिनों मुंबई में तीन दिन तक आतंकवाद का खुला खेल चला। 184 निर्दोषों की मौत हुई। कुछ जवान शहीद हुये। शहीदों की शहादत को सलाम। निहत्थे जनसामान्य की शहादत को सलाम। बड़ा सलाम उसे जो अब भी दहषत के साये में जी रहा है, या फिर जीने की कोषिष कर रहा है। इस घ...
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प्रशांत दुबे
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[02 Dec 2008 05:10 AM]



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