काश वो कुहरा ही होता .......................... (गैस त्रासदी की बरसी पर विशेष)

आत्मदर्पण वो भ्रम ही तो था उस धुंध को चंद तो कुहरा ही समझ बैठे थे पर वह कुहरा नहीं था वह तो जिन्दगी और मौत के बीच की धुंध थी काश वो कुहरा ही होता ..............!! आज तक बहता है आंखों से पानी मोमबत्ती की रोशनी भी नहीं पी पाती हैं, ये आंखें शोपीस से पैदा होते है... [पूरी पोस्ट]
writer प्रशांत दुबे
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[03 Dec 2008 01:40 AM]

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