गिनती ज़िन्दगी की

प्रतीक माहेश्वरी बच्चे थे तो टॉफियाँ गिना करते थे, थोड़े बड़े हुए तो दोस्त गिना करते थे, स्कूल पहुंचे तो हाथों पर छड़ियाँ गिना करते थे, कॉलेज आए तो मार्क्स गिना करते थे, थोड़े और बड़े हुए तो गर्ल-फ्रेंड्स गिना करते थे, नौकरी लगी तो तरक्कियां गिना करते थे, शादी हुई तो... [पूरी पोस्ट]
writer Pratik Maheshwari
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[13 Dec 2008 10:56 AM]

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