हंसता हुआ धर्म (ओशो की पुस्तकों से संकलित)-3

मटरगशती अमृतसर के स्टेशन पर जब टिकट चैकर आया तो सरदार जी ने देखा कि उनके बगल मे बैठे सज्जन ने कह दिया कि मै तो नेता जी हूँ और टिकट चॅकर आगे बढ गया। इसी तरह स्टेशन के गेट पर भी वे बाहर निकल गये और कुली को पैसे भी नहीं दिये। सरदार जी यह देखकर अत्यन्त प्रसन्न ह... [पूरी पोस्ट]
writer Dr Prabhat Tandon
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[05 May 2008 22:27 PM]

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