चन्द दोहे

मटरगशती पिछले कई दिनों से मै जगजीत सिंह जी की गायी इस नज्म को कई बार सुन चुका हूं लेकिन इस मे कुछ तो है जो मुझे बार -२ सुनने को प्रेरित करती है , हां , शायद इन दोहों के बोल ही हैं जो जिंदंगी की वास्तविकता को करीब से देखने की प्रेरणा देते हैं. आज जब रहा न गया... [पूरी पोस्ट]
writer Dr Prabhat Tandon

जगजीत सिंह

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[05 May 2008 22:22 PM]

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