अवधारणाएं
हम अक्सर बहुत सारी अवधारणाएं सच मान लेते हैं गाहे-बगाहे,जाने -अनजाने . हमें दिखाई देता है सूरज का हर शाम पर्वत पार सो जाना और अल सुबह मेहनती किसान की तरह जाग जाना हमें चाँद का आकार लगता है अनामिका के नाखून से छोटा धरती लगती है तश्तरी की तरह चपटी और ह...
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धीर.
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[01 Aug 2009 23:25 PM]



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