फ़लसफा : ज़िंदगी का
समय का ये कौन सा दौर है लगता है मौसम ने घोंट के सारी संवेदनाएं घोल दी है तन्हाई न स्मृति के फाटक पर यादों की दस्तक होती है न चित्रों चलचित्रों से हास्य रुदन की भावनाएं आती हैं बस विचारों की खींचातानी मची रहती है . . सूरज लगता है कोई बंधुआ मजदूर मद्धम...
[पूरी पोस्ट]
धीर.
10
0
0
0
0
[10 May 2009 10:14 AM]



Shuffle








