चैन,सुकून,शान्ति

फ़लसफा : ज़िंदगी का इस तरह मुँह फुलाए क्यूँ बैठे हो गुस्सा न हो अब मुझे क्या मालूम था तुम सचमुच ही जान निकालकर देखोगे . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . "तुम्हारे लिए मैं जान दे सकता हूँ" मेरा ऐसा कहना तुम्हें नाटकीय लगता है क्या कहा तुमने? "हर कोई यही कहता ह... [पूरी पोस्ट]
writer धीर.
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[23 Jul 2009 22:36 PM]

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