पाजी नज्में

फ़लसफा : ज़िंदगी का फासला दोनों के दरम्यान बस दो क़दमों का फासला था बढ़ाएगा पहला कदम वो सोचकर दूसरा नहीं बढ़ा बीमारी वह रहने आई थी मुहल्ले में दवाखाने भर गए हकीम समझ ही न सके मुहल्ले में कौन सी बीमारी आई है बातें ज़माने में दोनों की बहुत बातें होती थी पर रहते थे दोनों ख... [पूरी पोस्ट]
writer धीर.
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[02 Aug 2009 04:49 AM]

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