Abhivyakti ki khaatir

फ़लसफा : ज़िंदगी का कभी-कभी सोचता हूँ बंद कर दूँ ये कविता लिखना कविताएँ पढ़कर कभी लुटाये होंगे सैनिकों ने प्राण और बदली गयी होगी दुनिया किसी ज़माने में पर मैं आश्वस्त हूँ मेरी कविता से कुछ नहीं हो सकता न तो मैं मुर्दों में जान फूंक सकता हूँ न मैं बदहालों को कुछ दिला सकत... [पूरी पोस्ट]
writer धीर.
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[02 Aug 2009 04:25 AM]

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