ये जख्मों का किस्सा पुराना है...
ये कैसी हलचल है,कैसा आना-जाना है जाओ,मयकशी है यहाँ,ये मेरा आशियाना है . वक़्त ने भुला दिए हैं,अब न कुरेदो इनको गोया जल उठूँगा,ये जख्मों का किस्सा पुराना है . कौन जाने अबकी बिछ्ड़े तो कल को कब मिलें आजमा ले आज,जितना आजमाना है . आवारा-मिज़ाजी हमारी सीख...
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धीर.
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[17 Aug 2009 17:04 PM]



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