देख़ो लोगों मेरे जाने का है पैग़ाम आया.
देख़ो लोगों मेरे जाने का है पैग़ाम आया..(2) ख़ुदा के घर से है ये ख़त, मेरे नाम आया….देख़ो लोगो… जिसकी ख़वाहिश में ता-जिन्दगी तरसते रहे। वो तो ना आये मगर मौत का ये जाम आया। ख़ुदा के घर….. ज़िंदगी में हम चमकते रहे तारॉ की तरहॉ । रात जब ढल गइ, छुपने का ये मक़ाम...
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रज़िया "राज़"
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[10 Aug 2009 03:18 AM]



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