ग़ज़ल

Creative Kona ईमान की इक लाश की कर रहे थे तुम फ़िकर देखो, यहां लाशों का बस रहा है इक शहर देखो। लगी थी आग जो शोलों का अब असर देखो, किसी ने ढा दिया है हम पे ये कहर देखो। जुबां पे बन्दिश का जमाना गया गुजर देखो, मीठी बातों का मिल रहा है अब जहर देखो। कहा था तुमने मुहैय्... [पूरी पोस्ट]
writer creativekona

काव्य

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[17 Jun 2009 22:39 PM]

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