पेड़ बनाम आदमी
पेड़ जितना झेलता है सूरज को सूरज कभी नहीं झेलता पेड़ जितना झेलता है मौसम को मौसम कभी नहीं झेलता। ---और पेड़ जितना झेलता है आदमी को आदमी कभी नहीं झेलता सच तो यह है पेड़ अंधेरे में भी रोशनी फ़ेंकते हैं और अपने तैनात रहने को देते हैं आकार। ------और आदमी उजाल...
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creativekona
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[27 Jun 2009 13:53 PM]



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