एहसास
कब तक खेलते रहोगे तुम लुका छिपी का यह खेल मुझसे कब तक भटकते रहोगे इस सूखे रेगिस्तान में बरसने को आतुर बादलों की प्रतीक्षा में। क्या नहीं उठती कोई हलचल तुम्हारे अन्तः में बारिश की रेशमी फ़ुहारों के स्पर्श को अपने होठों पर महसूस करने की। विश्वास करो मुझ...
[पूरी पोस्ट]
creativekona
7
0
0
0
0
[20 Jul 2009 22:24 PM]



Shuffle








