रीतापन
हर बारिश में तुम्हारे पास होने का एहसास बुन देता है एक गुंजलक मेरे चारों ओर। बंध जाते हैं मेरे हाथ पांव कैद हो जाती हैं सांसें और गुंजलक खुलने पर मैं पाता हूं कि बारिश खतम हो चुकी है और मैं रीता रह गया हूं। ********** हेमन्त कुमार...
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creativekona
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[19 Aug 2009 09:39 AM]



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