गलतफहमियों की पतंग

नया बरिस्ता नाजुक रिश्तों के धागे में, आ के लिपट जाती है, गलतफहमियां की पतंग, वह ऐसे उलझाती है कि हम उसे हटाने में उलझा देते हैं पूरा धागे।। हम बेबस हो जाते हैं, पर कोई नहीं आता मदद को, सभी हमें ठहराते हैं जिम्मेदार, काश, कोई मुझे समझता कि मैं नहीं हूं पतंगबाज।।... [पूरी पोस्ट]
writer Arvind Mishra
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[26 Feb 2008 08:16 AM]

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